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Wednesday, December 31, 2025

 गोलीबारी, हवाई विस्फोट और फिदायीन हमले... PAK ने भुगता आतंकवाद को पनाह देने का खामियाजा, साल 2025 में क्या-क्या हुआ?

गोलीबारी, हवाई विस्फोट और फिदायीन हमले... PAK ने भुगता आतंकवाद को पनाह देने का खामियाजा, साल 2025 में क्या-क्या हुआ?

 गोलीबारी, हवाई विस्फोट और फिदायीन हमले... PAK ने भुगता आतंकवाद को पनाह देने का खामियाजा, साल 2025 में क्या-क्या हुआ?



2025 पाकिस्तान के लिए रक्तपात भरा साल रहा, जिसमें आतंकवाद से 3,967 मौतें हुईं, जो 2015 के बाद सर्वाधिक हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को हिंस ...और पढ़ें




साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल हिंसा में 3,967 लोग मारे गए।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2025 पाकिस्तान के लिए खून से लथपथ साल साबित हुआ। बंदूक की गोलीबारी, हवाई हमले और आत्मघाती विस्फोटों ने पूरे देश को दहला दिया।

साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल हिंसा में 3,967 लोग मारे गए, जो 2015 के बाद सबसे ज्यादा मौतें हैं। 27 दिसंबर तक 1,070 ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें आम नागरिकों से लेकर सैनिकों और आतंकवादियों तक सब शामिल थे।


इस बढ़ती हिंसा के पीछे मुख्य वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को माना जा रहा है, जो अफगानिस्तान के तालिबान से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते इस साल और बिगड़ गए, क्योंकि पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल टीटीपी को शरण दे रहा है।


टीटीपी की वजह से बिगड़े पाक-अफगान के रिश्ते?

पाकिस्तान ने कई बड़े हमलों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार ठहराया है। मिसाल के तौर पर, इस साल की शुरुआत में उत्तर वजीरिस्तान में एक सैन्य परिसर पर आत्मघाती हमले में सात पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।


इसके कुछ दिनों बाद काबुल ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी इलाके में हवाई हमले किए, जिसमें कई नागरिक मारे गए। पाकिस्तान ने इस आरोप से इनकार किया।

अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के दावों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे टीटीपी के नेताओं को शरण नहीं दे रहे और अफगानों को दूसरे देशों में लड़ने की इजाजत नहीं देते। नवंबर की शुरुआत में उनके प्रवक्ता ने कहा कि टीटीपी पाकिस्तानी सेना के अमेरिकी युद्ध में समर्थन और 2002 से आदिवासी इलाकों में ड्रोन हमलों के जवाब में उभरा।

दिसंबर में भी रिश्तों पर जमीं बर्फ नहीं पिघली

तुर्की और कतर ने नवंबर के अंत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की, लेकिन ये प्रयास हफ्तों में ही धराशायी हो गए। दिसंबर में सीमा पर झड़पें जारी रहीं। 2021 में अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान की अफगानिस्तान में सत्ता में वापसी से पाकिस्तान-अफगानिस्तान के रिश्ते बिगड़ने लगे।


पाकिस्तान को उम्मीद थी कि काबुल में दोस्ताना सरकार टीटीपी को काबू में करेगी, लेकिन उल्टा टीटीपी और मजबूत हो गया और आदिवासी इलाकों में विद्रोह तेज कर दिया।
 पेन किलर निमेसुलाइड पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 100 एमजी से ज्यादा की टैबलेट पर लगाया बैन

पेन किलर निमेसुलाइड पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 100 एमजी से ज्यादा की टैबलेट पर लगाया बैन

 पेन किलर निमेसुलाइड पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 100 एमजी से ज्यादा की टैबलेट पर लगाया बैन



केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 100 मिलीग्राम से अधिक वाली निमेसुलाइड पेन किलर टैबलेट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हु ...और पढ़ें





100 मिलीग्राम से अधिक निमेसुलाइड टैबलेट्स पर प्रतिबंध


स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य जोखिमों के कारण लिया फैसला


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानी-मानी पेन किलर दवा 'निमेसुलाइड' पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह बैन 100 मिलीग्राम से अधिक वाली निमेसुलाइड टैबलेट्स पर लागू होगा। सरकार ने स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला देते हुए इस प्रतिबंध का एलान किया है।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से परामर्श के बाद यह फैसला लिया है। ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 26ए के तहत यह प्रतिबंध लगाया गया है।
सरकार ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, "100 मिलीग्राम से अधिक निमेसुलाइड दवाओं का सेवन मनुष्यों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए बाजार में कई सुरक्षित विकल्प भी मौजूद हैं।"


बच्चों के लिए पहले से बैन थी टैबलेट

निमेसुलाइड एक नॉन स्टेरॉयडनल दवा है, जिसका पेन किलर (दर्द से राहत पाने के लिए) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, सरकार ने इसे लेकर चिंता व्यक्त की है। 2011 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए निमेसुलाइड के इस्तेमाल पर बैन लगाया था।

सरकार ने आदेश दिया था-

12 साल के कम उम्र के बच्चों के मेडिकल प्रिसक्रिप्शन में निमेसुलाइड नामक दवा नहीं लिखी जाएगी। इसका सेवन बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई देशों में इसके इस्तेमाल पर बैन लगा हुआ है।
किन देशों में बैन है निमेसुलाइड?

यूरोप के कई देशों में निमेसुलाइड टैबलेट पूरी तरह से बैन है। फिनलैंड, स्पेन, आयरलैंड और बेल्जियम जैसे यूरोपिय देशों ने इसपर 2007 में ही पाबंदी लगा दी थी। इसके अलावा कनाडा, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके में भी निमेसुलाइड के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा है।
 पुजारी से बहस....फिर शिवलिंग को किया अपवित्र, द्राक्षारामम मंदिर का संदिग्ध CCTV कैमरे में कैद

पुजारी से बहस....फिर शिवलिंग को किया अपवित्र, द्राक्षारामम मंदिर का संदिग्ध CCTV कैमरे में कैद

 पुजारी से बहस....फिर शिवलिंग को किया अपवित्र, द्राक्षारामम मंदिर का संदिग्ध CCTV कैमरे में कैद



आंध्र प्रदेश के द्राक्षारामम मंदिर में शिवलिंग अपवित्र करने के आरोप में नीलम श्रीनिवास को हिरासत में लिया गया है। यह घटना एकादशी के दिन हुई, जिसके बाद ...और पढ़ें



सदियों पुराने शिवलिंग में तोड़फोड़। (X-@YSRCParty)


 आंध्र प्रदेश के द्राक्षारामम मंदिर में सदियों पुराने शिवलिंग को अपवित्र करने के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। यह घटना मंगलवार तड़के, एकादशी के दिन हुई। जिसके बाद इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए और सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर चिंताएं पैदा हो गईं।


पुलिस ने एक संदिग्ध की पहचान थोतापेटा गांव के रहने वाले नीलम श्रीनिवास के रूप में की है। पुलिस ने बताया कि श्रीनिवास घटना स्थल कपिलेश्वर घाट के पास सीसीटीवी कैमरे में उस समय कैद हुआ, जब तोड़फोड़ हुई थी। पुलिस ने चार टीमें बनाकर संदिग्ध की तलाश की और पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया।


पुजारी के बहस के बाद संदिग्ध ने दिया घटना को अंजाम

शुरूआती जांच में किसी संगठित सांप्रदायिक कृत्य के बजाय संभावित व्यक्तिगत मकदस सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नीलम श्रीनिवास की हाल ही में एक स्थानीय मंदिर के पुजारी के साथ कुछ अनुष्ठानों के लेकर तीखी बहस हुई थी। आरोप है कि असहमति के बाद गुस्से में मंदिर प्रशासन के खिलाफ बदले की भावना से संदिग्ध ने सप्त गोदावरी नहर के किनारे स्थित शिवलिंग को निशाना बनाया।

सरकार ने दिए पारदर्शी जांच के निर्देश

मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को निर्देश दिया है कि संदिग्ध की पृष्ठभूमि या संबंधों की परवाह किए बिना पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।

नया शिवलिंग स्थापित किया

भक्तों को शांत करने और घाट की पवित्रता बहाल करने के लिए घटना के तुरंत बाद एक नया शिवलिंग विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। सप्त गोदावरी नदी के किनारे एचडी सीसीटीवी कैमरे और पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

Tuesday, December 30, 2025

कर्नाटक में बुजुर्ग ने तीन साल के मासूम को बार में जबरन पिलाई शराब, आबकारी विभाग ने लिया एक्शन

कर्नाटक में बुजुर्ग ने तीन साल के मासूम को बार में जबरन पिलाई शराब, आबकारी विभाग ने लिया एक्शन

 


कर्नाटक में बुजुर्ग ने तीन साल के मासूम को बार में जबरन पिलाई शराब, आबकारी विभाग ने लिया एक्शन


कर्नाटक के बेलगावी जिले के रायबाग में एक बुजुर्ग ने तीन साल के बच्चे को बार में शराब पिलाई। प्रीतम बार एंड रेस्तरां में हुई इस घटना का वीडियो वायरल हो ...और पढ़ें




आबकारी विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

 कर्नाटक के बेलगावी जिले के रायबाग कस्बे में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक बुजुर्ग व्यक्ति तीन साल के छोटे बच्चे को बार में ले गया और उसे अपने साथ शराब पीने के लिए मजबूर किया।


इसके बाद बार मालिक और कर्मचारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने एक नाबालिग बच्चे को बार में घुसने दिया और उसे शराब भी परोसी। यह घटना प्रीतम बार एंड रेस्तरां में हुई।

बुजुर्ग ने बच्चे को अपने साथ बैठाकर शराब पिलाई। बार में मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए, लेकिन किसी ने तुरंत रोकने की कोशिश नहीं की।
वीडियो वायरल होने के बाद भड़का लोगों का गुस्सा

मामला तब सामने आया जब बार में मौजूद एक शख्स ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। उसने यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।


वीडियो देखकर लोगों में आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने बार की लापरवाही और बुजुर्ग की हरकत की कड़ी निंदा की। सोशल मीडिया पर यह वीडियो देखते ही देखते हजारों लोगों तक पहुंच गया।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि बच्चा कितना छोटा है और उसे शराब पिलाना कितना खतरनाक हो सकता है। लोगों का कहना है कि बार स्टाफ को तुरंत रोकना चाहिए था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।
आबकारी विभाग ने मामले में दिखाई सख्ती

आबकारी विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। बेलगावी डिवीजन के जॉइंट कमिश्नर फकीरप्पा चलवादी ने कहा कि बार में नाबालिगों को घुसने देना और उन्हें शराब परोसना कानून का साफ उल्लंघन है।


टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, फकीरप्पा चलवादी ने कहा है कि शराब पीने की कानूनी उम्र 21 साल है और बार मालिक के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। विभाग बार की जांच कर रहा है और लाइसेंस संबंधी नियमों की भी पड़ताल होगी। अगर बार ने नियम तोड़े हैं, तो सजा तय है।

कानून क्या कहता है?

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत बच्चे को नशीला पदार्थ देने की सजा बहुत सख्त है। अगर कोई व्यक्ति बच्चे को शराब जैसी चीज पिलाता है, बशर्ते डॉक्टर की सलाह न हो तो उसे सात साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने की सगाई, गर्लफ्रेंड अवीवा बेग को पहनाई अंगूठी

प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने की सगाई, गर्लफ्रेंड अवीवा बेग को पहनाई अंगूठी

 प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने की सगाई, गर्लफ्रेंड अवीवा बेग को पहनाई अंगूठी



कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने अपनी प्रेमिका अवीवा बेग से सगाई कर ली है। 25 वर्षीय रेहान ने अवीवा को प्रपोज किया, जिसे उन्होंने ...और पढ़ें




कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, उनके बेटे रेहान वाड्रा अपनी गर्लफ्रेंड अवीवा बेग के साथ। फाइल फोटो

 कांग्रेस की दिग्गज नेता प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने सगाई कर ली है। 25 वर्षीय रेहान ने अवीवा बेग को अंगूठी पहनाते हुए शादी के लिए प्रपोज किया और अवीवा ने भी रेहान का प्रपोजल स्वीकार करते हुए हामी भर दी है।


प्रियंका गांधी और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान पिछले 7 साल से अवीवा को डेट कर रहे थे। वाड्रा परिवार ने भी इस रिश्ते को मंजूरी दे दी थी। वहीं, अब दोनों की सगाई हो चुकी है।

अवीवा बेग की बात करें, तो वो दिल्ली की रहने वाली हैं। उनका परिवार वाड्रा परिवार का करीबी माना जाता है। दोनों परिवार ने रेहान और अवीवा के रिश्ते को स्वीकार कर लिया है।
फोटोग्राफी के शौकीन हैं रेहान

रेहान वाड्रा पेशे से वर्चुअल आर्टिस्ट हैं, जो 10 साल की उम्र से दुनिया के अलग-अलग कोनों की खूबसूरत तस्वीरें लेते रहे हैं। रेहान कमर्शियल फोटोग्राफी के साथ-साथ वाइल्डलाइफ समेत कई चीजों की तस्वीरें खींचते हैं।


2017 में स्कूल क्रिकेट मैच के दौरान रेहान की आंख में चोट लग गई थी। मगर, इसके बाद भी उन्होंने अपना पैशन नहीं छोड़ा। वो कई प्रदर्शनियों में हिस्सा ले चुके हैं। 2021 में उन्होंने नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित 'डार्क परसेप्शन' से सोलो प्रदर्शनी में डेब्यू किया था।

मां ने किया प्रेरित

रेहान का कहना है कि उनकी मां प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन्हें फोटोग्राफी के लिए बचपन से ही प्रेरित किया है। उनके नाना और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी फोटोग्राफी का शौक था। वहीं, अब रेहान इस विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। रेहान की मंगेतर अवीवा बेग की बात करें, तो उन्होंने भी अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल में खुद को फोटोग्राफर और प्रोड्यूसर बताया है।
बेंगलुरु की बिल्डिंग में सिलेंडर ब्लास्ट, Capgemini के कर्मचारी की मौत

बेंगलुरु की बिल्डिंग में सिलेंडर ब्लास्ट, Capgemini के कर्मचारी की मौत

 बेंगलुरु की बिल्डिंग में सिलेंडर ब्लास्ट, Capgemini के कर्मचारी की मौत



बेंगलुरु के कुंडलहल्ली में एक को-लिविंग स्पेस में कमर्शियल गैस सिलेंडर फटने से 23 वर्षीय केपजेमिनी कर्मचारी अरविंद की मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य ...और पढ़ें




बेंगलुरु में गैस सिलेंडर फटने से एक युवक की मौत (सांकेतिक तस्वीर)

 बेंगलुरु के कुंडलहल्ली में एक को-लिविंग स्पेस में कमर्शियल गैस सिलेंडर फटने से 23 साल के केपजेमिनी के एक कर्मचारी की मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन् लोग य घायल हो गए।

यह घटना सोमवार को शाम करीब 6:15 बजे सेवन हिल्स साई को-लिविंग पेइंग गेस्ट फैसिलिटी में हुई। धमाका 43 कमरों वाली सात मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर हुआ था।
बेंगलुरु के कुंडलहल्ली में गैस सिलेंडर फटने से हादसा

पुलिस उपायुक्त (व्हाइटफील्ड) के परशुराम ने बताया, 'ग्राउंड फ्लोर पर कुछ धुआं दिखाई पड़ा था। जिसे चेक करने के लिए पीड़ित और दो अन्य लोग, जो छत पर थे, नीचे आए।


माना जा रहा है कि उसी समय धमाका हुआ, जिसमें अरविंद की मौत हो गई। घायलों में से दो प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी हैं और एक पीजी में हेल्पर का काम करता है।'

जैसे ही आग और धुएं का पता चला वैसे ही इमरजेंसी रिस्पॉन्स शुरू किया गया। फायर और पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को कंट्रोल किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल धमाके के कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।


पुलिस कर रही नियमों के उल्लंघन और धमाके के कारण की जांच

परशुराम ने आगे कहा, 'हम इमारत में नियमों के उल्लंघन की जांच कर रहे हैं। हमने पहले ही देखा है कि कंस्ट्रक्शन के दौरान कोई सेटबैक नहीं दिया गया था और हम यह वेरिफाई कर रहे हैं कि क्या अन्य नियमों का भी उल्लंघन किया गया था?'


कर्नाटक के बल्लारी के रहने वाले अरविंद की धमाके में मौत हो गई। घायल हुए तीन अन्य व्यक्तियों की पहचान 28 साल के वेंकटेश (कुरनूल), 23 साल के विशाल वर्मा (उत्तराखंड) और 25 साल की सीवी गोयल (उत्तराखंड) के रूप में हुई है। सभी घायलों का फिलहाल शहर के ब्रुकफील्ड अस्पताल में इलाज चल रहा है।


यह पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग को आंध्र प्रदेश के विष्णु नाम के एक व्यक्ति की है। इसे स्थानीय रूप से रोजा नाम की एक लड़की मैनेज करती है।

Monday, December 29, 2025

 दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन?

दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन?

 दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन?



दंडकारण्य के जंगलों में माओवादियों का इलाज करने वाले 'डॉ. रफीक' का असली नाम मंदीप है। पंजाब से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले मंदीप ने घने जंगलों ...और पढ़ें




माओवादियों का इलाज करने वाले डॉ. रफीक की कहानी। फाइल फोटो

दंडकारण्य के घने जंगलों में शिविर लगे थे, जहां टॉर्च की रोशनी में एक डॉक्टर ने माओवादी के सीने में लगी गोली निकाली थी। घने जंगल में हुए इस ऑपरेशन की भनक लोगों को लगी, तो गुमनाम डॉक्टर को 'डॉ. रफीक' का नाम दिया गया। हालांकि, खुफिया फाइलों में भी उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है।


अब आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने 'डॉ. रफीक' से जुड़े कई खुलासे किए हैं। 'डॉ. रफीक' का असली नाम मंदीप है, जिसने पंजाब से MBBS की डिग्री हासिल की थी। माओवादी संगठन का हिस्सा बनने वाला वो अकेला उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति है, जिसने दंडकारण्य में कई माओवादियों को मौत के मुंह से बाहर निकाला है।


पूर्व माओवादी ने खोली पोल

पूर्व माओवादी एम वेंकटराजु उर्फ सीएनएन चंदू के अनुसार, 'डॉ. रफीक' ने कई माओवादियों का इलाज किया है। उसने इमरजेंसी सर्विस करने से लेकर पैरामेडिक्स सेवाएं, घाव, मलेरिया, सांप काटने और गैस्ट्रोएंटेराइटिस तक का उपचार किया है।


टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान चंदू ने बताया, "'डॉ. रफीक' ने स्थानीय लोगों और कई माओवादियों को भी गोली लगने पर उपचार करने, टांके लगाने और गोली निकालने की ट्रेनिंग दी थी।"
2013 में हुआ था खुलासा

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, 2016 में 'डॉ. रफीक' दंडकारण्य से झारखंड चला गया था और वो आज भी सुरक्षाबलों की नजरों से ओझल है। उसका जिक्र पहली बार 2013 में सामने आया था। तब उसे 'सीक्रेट डॉक्टर' का नाम दिया गया था। 2018 में उसकी पत्नी रिंकी का नाम भी सामने आया था। 'डॉ. रफीक' ने कथित तौर पर खूंखार माओवादी कमांडर प्रशांत बोस का भी इलाज किया था।

फरार डॉक्टर की तलाश जारी

चंदू का कहना है कि स्थानीय लोग 'डॉ. रफीक' को भगवान की तरह पूजते थे। दूर-दराज से लोग सिर्फ उससे मिलने आते थे। छोटी खरोंच से लेकर बड़े बुखार के इलाज के लिए लोग 'डॉ. रफीक' पर ही निर्भर थे। उसने आदिवासी पुजारियों से जड़ी-बूटियों की भी जानकारी ली थी, जिनका इस्तेमाल वो इलाज के लिए करता था। 'डॉ. रफीक' आज भी फरार है और जांच एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।
 तेलंगाना में 17 साल के अलगाव के बाद कपल का तलाक, HC ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार; देना होगा 50 लाख का गुजारा भत्ता

तेलंगाना में 17 साल के अलगाव के बाद कपल का तलाक, HC ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार; देना होगा 50 लाख का गुजारा भत्ता

 तेलंगाना में 17 साल के अलगाव के बाद कपल का तलाक, HC ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार; देना होगा 50 लाख का गुजारा भत्ता


तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 17 साल पुराने वैवाहिक विवाद में फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पति को अपनी दूर रह रही पत्नी को 50 ...और पढ़ें




तेलंगाना में 17 साल के अलगाव के बाद कपल का तलाक। (प्रतीकात्मक तस्वीर)


 तेलंगाना उच्च न्यायालय ने करीब 17 साल पुराने एक वैवाहिक विवाद में फैमली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है। वहीं, उच्च न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि पति अपने दूर रह रही पत्नी को 50 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता दे।


दरअसल, जस्टिस के लक्ष्मण और जस्टिस नरसिंग राव नंदिकोंडा की बेंच ने फैसले में कहा कि द्रोणमराजू विजया लक्ष्मी और द्रोणमराजू श्रीकांत फणी कुमार के बीच रिश्ता पूरी तरीके से खत्म हो चुका है। कोर्ट ने यह भी माना कि दोनों के बीच एकजुट होने की कोई संभावना नहीं है।


22 साल पुराना है मामला

उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला मई साल 2002 में हुई शादी से जुड़ा हुआ है। दंपति की एक बेटी साल 2003 में पैदा हुई, लेकिन जन्म के तुरंत बात दंपती अलग-अलग रहने लगे। पूरा मामला कोर्ट पहुंचा।


साल 2008 में पति ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की अर्जी दी। वहीं, पत्नि ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका दायर की। दोनों पक्षों के बीच वर्षों तक केस चला, इस दौरान पत्नी की ओर आईपीसी की कई धाराओं के तहच केस दायर किया गया।

फैमली कोर्ट के आदेश को HC ने रखा बरकरार

साल 2015 में फैमली कोर्ट ने तलाक का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अपनी की सुनवाई के दौरान पाया कि शुरू में पत्नी बेटी के भविष्य के लिए एक होने की इच्छा जताती रही, लेकिन लंबे अलगाव के बाद अब वह भी पति के साथ रहने में रुचि नहीं दिखा रही


मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास पैदा हो चुका है और इतनी मुकदमेबाजी हुई कि रिश्ते की मरम्मत कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में उच्च न्यायालय ने भी फैमली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।


अपने फैसले में के लक्ष्मण ने लिखा कि विश्वास, प्रेम और एक दूसरे के साथ रहने की इच्छा के अभाव में दोनों पक्षों को वैवाहिक जीवन जीने का निर्देश देना सही नहीं होगा। ऐसा करने पर विवश करना दोनों पक्षों में अविश्वास को जन्म देता है। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि दोनों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं बची।

50 लाख का गुजारा भत्ता एकसाथ देना होगा

हाईकोर्ट ने फैमली कोर्ट की डिक्री को बरकरार रखा, हालांकि, फैमली कोर्ट द्वारा पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता और बेटी के भरण पोषण का कोई प्रावधान न करने पर आपत्ति जताई।

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि उक्त 50 लाख रुपये की राशि पत्नी और उनकी बेटी के स्थायी गुजारा भत्ता तथा भरण-पोषण सहित पूर्ण और अंतिम निपटारे के रूप में होगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि पत्नी को ये राशि तीन महीने के भीतर चुकानी होगी।
 कुलदीप सेंगर को रिहाई नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने HC के जमानत आदेश पर लगाई रोक

कुलदीप सेंगर को रिहाई नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने HC के जमानत आदेश पर लगाई रोक

'हम पीड़िता के प्रति जवाबदेह हैं', सुनवाई के दौरान CBI ने सुप्रीम कोर्ट में और क्या कहा?


सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। सीबी ...और पढ़ें



सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमनत पर रोक लगाई



 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के रेप केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया गया था।

हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की तीन-जजों की वेकेशन बेंच ने कहा कि सेंगर को हिरासत से रिहा नहीं किया जाना चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमें इस बात का पता है कि जब किसी दोषी या विचाराधीन कैदी को रिहा किया जाता है, तो ऐसे आदेशों पर आमतौर पर इस कोर्ट द्वारा उन लोगों को सुने बिना रोक नहीं लगाई जाती है। लेकिन खास तथ्यों को देखते हुए, जहां दोषी को एक अलग अपराध के लिए भी दोषी ठहराया गया है, हम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हैं।'

सेंगर को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने सेंगर को नोटिस भी जारी किया। जिसमें निर्देश दिया गया है कि चार हफ्तों के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाए।
CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल

सुनवाई के दौरान, CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे बहुत भयानक मामला बताया। उन्होंने कहा, 'हम पीड़िता के प्रति जवाबदेह हैं।'
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश

बता दें दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को उन्नाव के चार बार के विधायक रहे कुलदीप सेंगर की जेल की सजा को उनकी अपील लंबित रहने तक सस्पेंड कर दिया था। यह कहते हुए कि वह पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुके हैं कोर्ट ने सेंगेर को सशर्त जमानत दे दी थी।


हालांकि, वह जेल में ही रहेंगे क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भी 10 साल की जेल की काट रहे हैं और उस मामले में उन्हें जमानत नहीं मिली है।

Sunday, December 28, 2025

 कर्नाटक में बुलडोजर एक्शन से गरमाई सियासत, मुश्किल घड़ी में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार ने मिलाया हाथ

कर्नाटक में बुलडोजर एक्शन से गरमाई सियासत, मुश्किल घड़ी में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार ने मिलाया हाथ

 कर्नाटक में बुलडोजर एक्शन से गरमाई सियासत, मुश्किल घड़ी में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार ने मिलाया हाथ



बेंगलुरु के कोगिला लेआउट में बुलडोजर कार्रवाई से राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस कार्रवाई का ब ...और पढ़ें



कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार। फाइल फोटो


 कर्नाटक के बेंगलुरु में कोगिला लेआउट में तोड़फोड़ के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी को इस कदम के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, लंबे समय से खटपट की खबरों को लेकर चर्चा में रहे राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार एक मंच पर आ गए हैं।


बेंगलुरु के कोगिला लेआउट पर 20 दिसंबर को हुए बुलडोजर एक्शन के बाद कई परिवार बेघर हो गए। इसे लेकर राज्य में बवाल मच गया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने जब इसका विरोध किया, तो सीएम सिद्धरमैया भी कड़ी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूके।


सीएम सिद्धरमैया ने क्या कहा?

सीएम सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, "कोगिला लेआउट में कई लोगों ने अवैध रूप से घर बना लिए थे। यहां कचरा जमा होता है, जिसके कारण यह जगह लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।"


सीएम सिद्धरमैया ने आगे कहा-


अवैध रूप से रह रहे कई लोगों को घर छोड़ने का नोटिस जारी किया गया था। मगर, इसके बावजूद लोगों ने इसका पालन नहीं किया। ऐसे में अतिक्रमण को हटाना जरूरी हो गया था।
केरल सीएम ने साधा था निशाना

केरल के सीएम विजयन ने कर्नाटक सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था,"बेंगलुरु में फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट को बुलडोजर से धराशायी कर दिया गया। यहां रहने वाले मुस्लिम परिवारों को विस्थापित करना सरकार की क्रूरता को उजागर करता है।" इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक सरकार की कार्रवाई को 'बुलडोजर न्याय' करार दिया है।
डिप्टी सीएम ने दी प्रतिक्रिया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी विजयन के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिनारयी विजयन जैसे नेताओं ने सच्चाई जाने बिना ही, सवाल उठाना शुरू कर दिया है। उन्हें मामले की वास्तविकता पता होनी चाहिए।"


'बुलडोजर न्याय' को खारिज करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, "यह हमारी संस्कृति नहीं है। सच जाने बिना आपको राज्य के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यहां कचरे का निवारण करने के लिए एक खादान मौजूद है। 9 साल पहले इसकी स्थापना की गई थी। हम भूमि माफियाओं को सरकारी जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियां नहीं बनाने देंगे।"
 त्रिपुरा के मेडिकल छात्र की देहरादून में दर्दनाक मौत, नस्लीय टिप्पणी के खिलाफ बोलने पर हुई सरेआम हत्या

त्रिपुरा के मेडिकल छात्र की देहरादून में दर्दनाक मौत, नस्लीय टिप्पणी के खिलाफ बोलने पर हुई सरेआम हत्या

 त्रिपुरा के मेडिकल छात्र की देहरादून में दर्दनाक मौत, नस्लीय टिप्पणी के खिलाफ बोलने पर हुई सरेआम हत्या



Anjel Chakma Death: देहरादून में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करने पर त्रिपुरा के एमबीए छात्र अंजेल चकमा की बेरहमी से पिटाई और चाकू मारकर हत्या कर दी गई। 9 ...और पढ़ें



मेडिकल के छात्र अंजेल चकमा की हत्या। फोटो - X

 उत्तराखंड के देहरादून में नस्लीय टिप्पणी करने पर एक आदिवासी छात्र को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। छात्र का शव त्रिपुरा पहुंचते ही पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।

पीड़ित का नाम अंजेल चकमा है, जो त्रिपुरा का निवासी था। अंजेल देहरादून के जिज्ञासा विश्वविद्यालय में एमबीए के अंतिम वर्ष का छात्र था। अंजेल पर जानलेवा हमले के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गया था। कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ने के बाद अंजेल ने दम तोड़ दिया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल देहरादून के सेलाक्वी इलाके में 9 दिसंबर को शाम लगभग 6-7 बजे अंजेल अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ किराने का सामान खरीदने बाहर गया था। इस दौरान शराब के नशे में धुत्त कुछ लोगों ने दोनों भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां कर दीं।


खबरों के अनुसार, हमलावरों ने अपशब्दों के साथ कई अपमानजनक बातें भी की। जब दोनों भाइयों ने इसका विरोध किया, जो हमलावरों ने हिंसा शुरू कर दी। इस दौरान माइकल के सिर पर प्रहार किया गया। वहीं, अंजेला की गर्दन और पेट में चाकू मार दी गई। अंजेला को स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।



अंतिम संस्कार में जुटी भीड़

अंजेला के शव को दिल्ली के रास्ते अगरतला ले जाया गया। महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे पर परिवार के सदस्यों समेत कई नेता मौजूद थे। वहां से शव को अंजेला के पैतृक गांव उनाकोटी ले जाया गया। उसके अंतिम संस्कार से पहले घर के बाहर भारी संख्या में लोगों का जमावड़ा लग गया।

केंद्र सरकार से की गई मांग

अंजेला की मौत के बाद परिजनों समेत कई छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, साथ ही उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के युवाओं पर होने वाली नस्लीय टिप्पणी की समस्या के समाधान के लिए कठोर कदम उठाए जाएं।
 MPPSC ने परीक्षा से पहले की बड़ी चूक, गलत एडमिट कार्ड जारी करने से अभ्यार्थियों में मचा हड़कंप

MPPSC ने परीक्षा से पहले की बड़ी चूक, गलत एडमिट कार्ड जारी करने से अभ्यार्थियों में मचा हड़कंप

 MPPSC ने परीक्षा से पहले की बड़ी चूक, गलत एडमिट कार्ड जारी करने से अभ्यार्थियों में मचा हड़कंप



MPPSC ने कंप्यूटर विज्ञान परीक्षा 2026 के लिए गलत एडमिट कार्ड जारी किए, जिससे अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया। एडमिट कार्ड में गलत निगेटिव मार्किंग का उ ...और पढ़ें



मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने गलत एडमिट कार्ड जारी किया। फाइल फोटो

 मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आयोग ने कम्प्यूटर विज्ञान परीक्षा 2025 के लिए गलत एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। मामला सामने आने के बाद MPPSC ने विंडो बंद कर दी।


MPPSC ने बीते दिन अपनी गलती स्वीकार करते हुए एडमिट कार्ड में बदलाव करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने अभी तक अभ्यार्थियों को नया प्रवेश पत्र नहीं दिया है, जिससे विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है।
एडमिट कार्ड में क्या हुई गलती?

आयोग के द्वारा जारी किए गए एडमिट कार्ड में लिखा था कि गलत उत्तर पर 1 अंक काटे जाएंगे, जबकि सही उत्तर पर 3 अंक मिलेंगे। हालांकि, वास्तव में इस परीक्षा में कोई भी निगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है।


एडमिट कार्ड गलत होने के बाद आयोग ने तुरंत विंडो बंद कर दी। जानकारी के अभाव में गलत एडमिट कार्ड देखने के बाद अभ्यार्थियों के पसीने छूटने लगे। वहीं, विंडो बंद होने के बाद अभ्यार्थी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का प्रयास करते रहे।

आयोग ने मांगी माफी

MPPSC ने भूल स्वीकार करते हुए कहा कि एडमिट कार्ड में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन पूरा होने के बाद सभी छात्र वेबसाइट से सही एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।
कब होगी परीक्षा?

बता दें कि सहायक प्राध्यापक कम्प्यूटर साइंस परीक्षा 4 जनवरी 2026 को 2 सत्रों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में एडमिट न मिलने से अभ्यार्थियों में असमंजस की स्थिति है। सभी अभ्यार्थियों ने मांग की है कि आयोग को एडमिट कार्ड संशोधित करके मामले पर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

Saturday, December 27, 2025

 'शरीर पर जख्म, अंडरगारमेंट्स गायब...', उदयपुर गैंगरेप केस में पीड़िता ने किए चौंकाने वाले खुलासे

'शरीर पर जख्म, अंडरगारमेंट्स गायब...', उदयपुर गैंगरेप केस में पीड़िता ने किए चौंकाने वाले खुलासे

 'शरीर पर जख्म, अंडरगारमेंट्स गायब...', उदयपुर गैंगरेप केस में पीड़िता ने किए चौंकाने वाले खुलासे



राजस्थान के उदयपुर में एक महिला से दुष्कर्म के मामले में GKM IT के सीईओ जितेश प्रकाश सिसोदिया, शिल्पा सिरोही और उनके पति गौरव सिरोही को गिरफ्तार किया ...और पढ़ें



उदयपुर रेप पीड़िता ने सुनाई आपबीती। प्रतीकात्मक तस्वीर


 राजस्थान के उदयपुर में महिला संग हुई दुष्कर्म की घटना पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने GKM IT के सीईओ जितेश प्रकाश सिसोदिया, फर्म की महिला एक्जीक्यूटिव हेड शिल्पा सिरोही और उनके पति गौरव सिरोही को हिरासत में लिया है।


20 दिसंबर को कार में इस घटना को अंजाम दिया गया था। महिला की मेडिकल रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हो चुकी है। पीड़िता के शरीर पर गहरे घाव मिले हैं। साथ ही उसके प्राइवेट पार्ट में भी कई गंभीर चोटें आईं हैं।


बर्थडे पार्टी से घर छोड़ने का दिया ऑफर

राजस्थान पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हुए पीड़िता ने बताया कि उसके गहने, मोजे और अंडरगारमेंट्स गायब हैं। महिला पेशे से IT फर्म में मैनेजर थी। 20 दिसंबर को वो सिसोदिया की जन्मदिन पार्टी में शिरकत करने के लिए उदयपुर के शोभागपुरा स्थित होटल में पहुंची थी। पीड़िता समेत पार्टी में मौजूद सभी लोगों ने शराब पी थी। पीड़िता की हालत अचानक बिगड़ने लगी। तभी रात को लगभग 1:30 बजे सिसोदिया, शिल्पा और गौरव ने उसे घर छोड़ने का ऑफर दिया।

पीड़िता को पिलाई सिगरेट

पीड़िता के अनुसार, गौरव गाड़ी चला रहा था। शिल्पा, जितेश और पीड़िता पीछे की सीट पर बैठे थे। कार उन्हीं में से किसी की थी। रास्ते में आरोपी ने सिगरेट लेने के लिए एक दुकान पर गाड़ी रोकी और पीड़िता को भी पीने के लिए दिया। इसके बाद पीड़िता बेहोश हो गई।

डैशकैम में कैद हुई घटना

पुलिस का कहना है कि जब महिला को होश आया, तो उसके शरीर में काफी चोटें लगी थीं। उसने कार का डैशकैम चेक किया, तो उसमें सारी घटना रिकॉर्ड हो गई थी। महिला ने आरोपियों की बातें भी सुनी। 23 दिसंबर को महिला पुलिस स्टेशन पहुंची और सिसोदिया, शिल्पा और गौरव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।


पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया। कोर्ट ने सभी को 4 दिन की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
अवैध शराब की तलाशी के दौरान पुलिस को मिली नोटों से भरी अलमारी, गड्डियां गिनने के लिए मंगाई मशीन

अवैध शराब की तलाशी के दौरान पुलिस को मिली नोटों से भरी अलमारी, गड्डियां गिनने के लिए मंगाई मशीन

 अवैध शराब की तलाशी के दौरान पुलिस को मिली नोटों से भरी अलमारी, गड्डियां गिनने के लिए मंगाई मशीन


पुणे के कोंढवा में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस की छापेमारी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। एक घर से 70 लीटर शराब के साथ एक करोड़ से अधिक की नकदी नोटों से भर ...और पढ़ें



पुणे में भारी मात्रा में कैश बरामद। फोटो - X

 महाराष्ट्र के पुणे से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस ने जब छापेमारी की, तो नोटों से भरी अलमारी देखकर पुलिस भी सन्न रह गई। अलमारी में नोटों की इतनी सारी गड्डिया थीं कि गिनते-गिनते पुलिस की भी सांसें फूल गईं और आखिर में पुलिस को नोट गिनने वाली मशीन बुलानी पड़ी।


यह मामला पुणे के कोंढवा स्थित काकड़े वस्ती का है। मामला सामने आने के बाद इनकम टैक्स विभाग भी अलर्ट हो गया है। पुलिस ने यहां से 2 लाख की शराब के अलावा 1.41 लाख रुपये भी जब्त किए हैं।


70 लीटर शराब मिली

दरअसल कोंढवा पुलिस को मुखबिरी के आधार पर पता चला कि काकड़े वस्ती में एक घर पर अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। क्राइम ब्रांच की टीम ने गुरुवार को छापेमारी की, तो घर से व्हिस्की, रम समेत 70 लीटर शराब बरामद हुई।


वहीं, जब छानबीत करते हुए पुलिस घर के बेडरूम में पहुंची, तो तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ अलमारी लगी। इस अलमारी के सभी खानों में नोटों की गड्डियां रखी थीं, जिसे देखकर पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गईं। जब पुलिस ने नोट गिनने शुरू किए, तो कीमत लाखों में पहुंच गई।



महाराष्ट्र के पुणे के कोंढवा इलाके में अवैध शराब व्यापार के ख़िलाफ़ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान एक करोड़ से ज्यादा की नकदी जब्त की गई। साथ ही 3 लोग भी गिरफ्तार हुए हैं। 
3 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत 3 लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की है। आरोपियों की पहचान अमर कौर, दिलदार सिंह और देवश्री जुन्नी सिंह के रूप में हुई है। पुलिस को अवैध शराब के काले धंधे का पूरा नेटवर्क पता लगाने की कोशिश कर रही है।
ऑपरेशन क्लीन

बता दें कि पुलिस ने ड्रग्स और नशे के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू किया है। इससे पहले पुणे पुलिस ने 3.45 करोड़ रुपये के ड्रग्स बरामद किए थे।
 भोपाल की सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे बीमार, जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण; रिपोर्ट में कई खुलासे

भोपाल की सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे बीमार, जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण; रिपोर्ट में कई खुलासे

 भोपाल की सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे बीमार, जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण; रिपोर्ट में कई खुलासे



भोपाल-इंदौर रोड पर बस, टैक्सी और ऑटो चालकों की सेहत की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भोपाल ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, 10 ड्राइवरों मे ...और पढ़ें



भोपाल में जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण। (प्रतीकात्मक तस्वीर)


मध्य प्रदेश में वाहन चालकों की सेहत को लेकर एक अहम खुलासा हुआ है। भोपाल–इंदौर रोड पर बस, टैक्सी और ऑटो चालकों की सेहत को लेकर भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने की जांच कराई, जिसके परिणाम चौंकाने वाले निकले।


रिपोर्ट में पाया गया है कि 10 ड्राइवरों में फर्स्ट स्टेज मुंह के कैंसर के लक्षण पाए गए, वहीं करीब एक चौथाई ड्राइवरों में आंखों की दिक्कत देखने को मिली है। यह सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि पुलिस इन ड्राइवरों का उपचार भी करवा रही है।


बीमारी बन रही हादसों की वजह

चूंकि भोपाल-इंदौर रूट काफी व्यस्त रूट्स में से एक माना जाता है। यहां गर घंटे 5 से 6 हजार चार चक्का वाहनों की आवाजाही होती रहती है। सबसे बड़ी समस्या है कि बीमारी के बाद भी कई चालक वाहन चला रहे हैं। इस कारण हादसों की संभावना बनी रहती है।


इसको लेकर एसीपी ट्रैफिक विजय दुबे का कहना है कि सड़क पर हादसों को रोकने की पहल की गई है। शनिवार को भी यह जांच जारी रखी जाएगी।
चालकों की सेहत पर बढ़ी चिंता

बता दें कि इस दौरान वाहन ड्राइवरों की जांच में कुल 219 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के नतीजों में पाया गया कि करीब हर चौथा ड्राइवर किसी न किसी विजन संबंधी समस्या से प्रभावित है। वहीं, करीब 23 प्रतिशत चालकों को इलाज, चश्मे या आगे की जांच के लिए रेफर करने की जरूरत पड़ी।


50 ड्राइवरों को आई ड्रॉप्स दी गईं, 25 को चश्मा लगाने की सलाह दी गई, जबकि 15 ड्राइवरों में मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण पाए गए। इसके अलावा 22 मामलों में अन्य कारणों से रेफरल किया गया।
आंकड़ों में समझें समस्या की गंभीरता

डेंटल जांच में स्थिति और गंभीर रही। करीब 78 प्रतिशत ड्राइवरों को दांतों के इलाज की जरूरत पाई गई। हर चार में से एक ड्राइवर को दांत निकलवाने की सलाह दी गई, हर सातवां ड्राइवर आरसीटी कैटेगरी में आया, हर छठे ड्राइवर को स्केलिंग की आवश्यकता बताई गई और 15 प्रतिशत से अधिक मामलों में फिलिंग जरूरी पाई गई।

सड़क सुरक्षा से जुड़ा है ड्राइवरों का स्वास्थ्य

विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट ड्राइवर रोजाना सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी उठाते हैं। आंखों की कमजोरी, मोतियाबिंद या दांतों का लगातार दर्द ड्राइवर की एकाग्रता और क्षमता को प्रभावित करता है। लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान ये समस्याएं दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यह साफ है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों और चालान तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्राइवरों की सेहत से भी इसका सीधा संबंध है।

Friday, December 26, 2025

 कौन है गुलाम नबी फई? US में रहकर भारत विरोधी साजिश, NIA जब्त करेगी कश्मीर में संपत्ति

कौन है गुलाम नबी फई? US में रहकर भारत विरोधी साजिश, NIA जब्त करेगी कश्मीर में संपत्ति

 कौन है गुलाम नबी फई? US में रहकर भारत विरोधी साजिश, NIA जब्त करेगी कश्मीर में संपत्ति



जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में एनआईए अदालत ने गुलाम नबी फई की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। फई पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है ...और पढ़ें



कौन हैं डॉ. गुलाम नबी फई? (फाइल फोटो)

कश्मीर में जन्मे और अमेरिका में रहने वाले गुलाम नबी फई की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी हुआ है। यह आदेश जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले की एक विशेष एनआईए अदालत ने यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में अहम फैसला सुनाया है।


दरअसल, डॉ. गुलाम नबी फई वर्तमान में अमेरिका में रह रहा है और उस पर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के गंभीर आरोप हैं। उसे बडगाम में एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने पहले ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत घोषित अपराधी घोषित किया था।




कौन है गुलाम नबी फई?

बता दें कि सैयद गुलाम नबी फई कश्मीरी मूल के अमेरिकी नागरिक और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ता है। उसने अमेरिका में कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल नामक संगठन की स्थापना की थी और कश्मीरी अलगाववादी समूहों और पाकिस्तान सरकार की ओर से पैरवी की। साल 2011 में, अमेरिकी सरकार ने कहा कि यह पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का मुखौटा समूह था।


कोर्ट के अनुसार,गुलाम नबी फई वॉशिंगटन स्थित कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल का प्रमुख है। इस संगठनको जांच एजेंसियां पाकिस्तान समर्थित संगठन मानती है। नबी पर उस पर यूएपीए की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है, जिनमें धारा 10 (गैरकानूनी संगठन से जुड़ाव), धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों का समर्थन) और धारा 39 (आतंकी संगठनों को सहयोग) शामिल है। इसे कोर्ट साल 2020 में ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है।

ये संपत्तियां होंगी कुर्क

अप्रैल में विशेष एनआईए न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अप्रैल 2025 में जारी उद्घोषणा आदेश के तहत आरोपी को 30 दिनों के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। इसके बाद अब कोर्ट ने बडगाम के उपायुक्त को आदेश दिया है कि डॉ. फई की अचल संपत्ति कुर्क की जाए। कुर्क की जाने वाली संपत्तियों में वडवान गांव में स्थित 1 कनाल 2 मरला भूमि और चट्टाबुग गांव में स्थित 11 मरला जमीन शामिल है।



पाकिस्तान जाता रहता था फई

जुलाई 2011 में FBI द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पहले, गुलाम नबी फई पाकिस्तान जाता रहता था और ISI समेत बड़े राजनीतिक, सरकारी और मिलिट्री अधिकारियों से मिलता था। फई की पकड़ अमेरिका की स्टेट डिपार्टमेंट के मिड-लेवल अधिकारियों और कुछ सीनेटरों तक थी। US अटॉर्नी और लॉबिस्ट पॉल मैनाफोर्ट से भी उसका सबंध था।


1990 में US की नागरिकता लेने के बाद, फई ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी। तब से, पाकिस्तानी सेना और ISI के साथ उसके संबंधों के कारण उसे भारत का वीज़ा देने से मना कर दिया गया है।

तीन दशकों से ज्यादा समय से, गुलाम नबी फई कश्मीर मुद्दे पर एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय लॉबिस्ट रहा है। हाल ही में, जम्मू और कश्मीर में एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने बडगाम में संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया। फई पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के लिए प्रॉक्सी के तौर पर काम करने का आरोप है।

बडगाम से वाशिंगटन तक

बडगाम में पैदा हुआ फई तीन दशक से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहा है और उसके पास अमेरिकी नागरिता है। उसने कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल (KAC) का नेतृत्व किया, जो एक भारत विरोधी मंच है जो खुद को एक स्वतंत्र नागरिक समाज मंच के रूप में दिखाता है।


भारतीय एजेंसियां लंबे समय से उन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए एक माध्यम के रूप में काम करने का आरोप लगाती रही हैं। मौजूदा NIA मामले में, फई पर UAPA के तहत जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है, जिसमें जांचकर्ताओं ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर से उनके संबंधों और हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन से उनकी निकटता का हवाला दिया है।


2011 में जब उसे FBI ने गिरफ्तार किया तो फई की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बड़ा झटका लगा। अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर ने बाद में यह साबित किया कि दो दशकों से ज्यादा समय तक, KAC पाकिस्तान की ISI के लिए एक फ्रंट के तौर पर काम कर रहा था, और फई कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों और पॉलिसी बनाने वालों को प्रभावित करने के लिए कम से कम 3.5 मिलियन डॉलर का फंड दे रहा था।




2012 में, एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने फई को साज़िश और टैक्स उल्लंघन के लिए दो साल की जेल और तीन साल की निगरानी में रिहाई की सजा सुनाई। अमेरिकी अटॉर्नी नील मैकब्राइड ने कोर्ट को बताया कि फई ने जस्टिस डिपार्टमेंट, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (अमेरिकी टैक्स एजेंसी), और राजनीतिक नेताओं से झूठ बोला था, और अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सालों तक झूठा दावा किया था कि उसके पास फिलाडेल्फिया की टेम्पल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री है।

कोर्ट ने घोषित किया था भगौड़ा

कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया है भारत में फई के खिलाफ NIA का मामला 2020 में दर्ज किया गया था। बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद, फई भारतीय अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुआ। इस साल अप्रैल में, बडगाम में स्पेशल NIA कोर्ट ने उसे पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश देते हुए 30 दिन का नोटिस जारी किया। जब फई ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, तो कोर्ट ने उसे औपचारिक रूप से "घोषित भगोड़ा" घोषित कर दिया।
 केरल में बीजेपी ने रचा इतिहास, तिरुवनंतपुरम में पहली बार बना पार्टी का मेयर

केरल में बीजेपी ने रचा इतिहास, तिरुवनंतपुरम में पहली बार बना पार्टी का मेयर

 केरल में बीजेपी ने रचा इतिहास, तिरुवनंतपुरम में पहली बार बना पार्टी का मेयर




भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केरल में इतिहास रच दिया है। वीवी राजेश तिरुवनंतपुरम के मेयर चुने गए हैं। भाजपा ने 101 में से 50 वार्डों में जीत हासिल की ...और पढ़ें




वीवी राजेश बने तिरुवनंतपुरम के मेयर। (फाइल फोटो)


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दक्षिणी राज्य केरल में इतिहास रच दिया है। शुक्रवार दोपहर को वीवी राजेश ने राजधानी तिरुवनंतपुरम के मेयर के तौर पर शपथ ली।

पदभार संभालने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने कहा, "हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे... सबको साथ लेकर चलेंगे। सभी 101 वार्डों में विकास किया जाएगा... तिरुवनंतपुरम को एक विकसित शहर में बदला जाएगा।" इन चुनावों में भाजपा ने 101 में से 50 वार्डों में जीत हासिल की थी। ये केरल में किसी नगर निगम में उसकी पहली जीत है।

वीवी राजेश को मिले 51 वोट

शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव में राजेश को 51 वोट मिले, जिसमें एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भी शामिल था। एलडीएफ के पी. शिवाजी को 29 वोट मिले, जबकि यूडीएफ उम्मीदवार के. एस. सबरिनाथन को 19 वोट मिले, जिनमें से दो को बाद में अमान्य घोषित कर दिया गया। बाद में राजेश ने तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के मेयर के तौर पर शपथ ली।


भाजपा के लिए नए अध्याय की शुरुआत

एलडीएफ के लगभग चार दशकों के शासन के बाद अब कॉर्पोरेशन पर भाजपा का कब्जा है। राजेश का मेयर बनना केरल की शहरी राजनीति में भाजपा के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। राज्य की राजधानी में इस जीत ने शहर के नगर निकाय पर सीपीएम के 45 साल के कंट्रोल को खत्म कर दिया।


समारोह के बाद केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने पत्रकारों से कहा, "CPM ने कांग्रेस के अप्रत्यक्ष या पर्दे के पीछे से मिले समर्थन से तिरुवनंतपुरम को बर्बाद कर दिया है।"
 विशाखापट्टनम के रुशिकोंडा पैलेस का दीदार कब से कर सकेंगे आम लोग? सरकार जल्द लेगी फैसला

विशाखापट्टनम के रुशिकोंडा पैलेस का दीदार कब से कर सकेंगे आम लोग? सरकार जल्द लेगी फैसला

 विशाखापट्टनम के रुशिकोंडा पैलेस का दीदार कब से कर सकेंगे आम लोग? सरकार जल्द लेगी फैसला



आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में रुशिकोंडा पैलेस पर जल्द फैसला आने वाला है। चंद्रबाबू नायडू सरकार इसे पर्यटन के लिए उपयोग करने की योजना बना रही है। रा ...और पढ़ें



कब से खुलेगा रुशिकोंडा पैलेस?


 आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित रुशिकोंडा पैलेस पर अंतिम फैसला जल्द ही आने वाला है। चंद्रबाबू नायडू की सरकार इस महल का प्रयोग आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र के लिए करने की योजना बना रही है।


बुधवार, 24 दिसंबर को राज्य सचिवालय में कैबिनेट उप-समिति की बैठक हुई। इस बैठक में पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति को महल की स्थिति और इसके उपयोग के संभावित विकल्पों के बारे में जानकारी दी।
रुशिकोंडा पैलेस में रुक सकेंगे मेहमान?

सरकार द्वारा इस समिति का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि यह संपत्ति जनहित में रहे, राज्य पर वित्तीय बोझ न बनी रहे। इसके साथ ही सरकार के लिए नियमित राजस्व भी दे।



समिति को इस बारे में भी जानकारी दी गई कि ताज ग्रुप, द लीला पैलेस, एटमॉस्फियर कोर और फेमा सहित कई आतिथ्य समूहों ने संपत्ति को एक लग्जरी होटल में बदलने के प्रस्ताव दिए हैं।

हालांकि, समिति ने यह भी पाया कि यहां की मौजूदा इमारतें होटल के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। कुछ कंपनियों ने सुझाव दिया कि इस परियोजना को शुरू करने के लिए और भी चीजों की आवश्यकता पड़ेगी।
कब से खुलेगा रुशिकोंडा पैलेस?

रुशिकोंडा पहाड़ी पर समुद्र के सामने बना रुशिकोंडा पैलेस परिसर आंध्र प्रदेश के सबसे चर्चित राजनीतिक विवादों में से एक है। इसे लेकर उप-समिति की अगली बैठक 28 दिसंबर को होगी। इस चर्चा से प्राप्त अंतिम प्रस्तावों को अनुमोदन के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद ही फैसला होगा कि इस पैलेस को कब से टूरिस्ट प्लेस के तौर पर शुरू किया जाएगा।

Thursday, December 25, 2025

 3500 KM रेंज और 17 टन वजन... भारत ने पनडुब्बी से किया K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण

3500 KM रेंज और 17 टन वजन... भारत ने पनडुब्बी से किया K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण

 3500 KM रेंज और 17 टन वजन... भारत ने पनडुब्बी से किया K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण



भारत ने 3,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसका वजन 17 टन है। इस मिसाइल के परीक्षण से दुश्मनों में खलबली मच गई ...और पढ़ें




भारत ने किया K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण। (फोटो- सोशल मीडिया)


 भारत ने 23 दिसंबर 2025 को एक गोपनीय पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल परीक्षण किया। बताया जा रहा है कि ये परीक्षण बंगाल की खाड़ी में किया गया।

दरअसल, यह परीक्षण परमाणु-सक्षम के-4 मिसाइल का था। यह अरिहंत-क्लास पनडुब्बी से लॉन्च की गई। इस परीक्षण को लेकर पहसे से कोई घोषणा नहीं की गई थी। वहीं, NOTAM भी रद किया गया था, जिससे गोपनीयता बनाई रखी जा सके। दावा किया जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि इस क्षेत्र में चीनी निगरानी जहाज मौजूद थे।


बता दें कि यह परीक्षण भारत की समुद्र आधारित न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत कर रहा, जिससे सेकंड स्ट्राइक की क्षमता सुनिश्चित होती है। इस मिसाइल से दुश्मन के पहले हमले के बाद ही जवाबी कार्रवाई की गारंटी भी मिल जाती है।


क्या है इस के-4 मिसाइल की खासियत?

इस के-4 मिसाइल की सबसे खास बात है कि यह स्वदेशी के- सीरीज की मिसाइल है। यह डीआरडीओ की ओर से विकसित की गई है। ये मिसाइल खास तौर पर अरिहंत-क्लास परमाणु पनडुब्बियों के लिए ही डिजाइन की गई है।


इस मिसाइल की रेंज करीब 3500 किलोमीटर है। वहीं, इसकी लंबाई 12 मीटर के करीब है। व्यास की बात करें तो वह 1.3 मीटर है। मिसाइल का वजन 17-20 टन का है। पेलोड की बात करें तो यह 2 टन तक है। इसमें पानी के नीचे से लॉन्च (कोल्ड लॉन्च सिस्टम), 3डी मैन्यूवर करने में सक्षम, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस से बचने की ताकत भी है।
 क्रिसमस पर दिल्ली के चर्च में खास प्रार्थना सभा में शामिल हुए पीएम मोदी, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

क्रिसमस पर दिल्ली के चर्च में खास प्रार्थना सभा में शामिल हुए पीएम मोदी, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

 क्रिसमस पर दिल्ली के चर्च में खास प्रार्थना सभा में शामिल हुए पीएम मोदी, देशवासियों को दी शुभकामनाएं



क्रिसमस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के एक चर्च में विशेष प्रार्थना सभा में भाग लिया। उन्होंने देशवासियों को क्रिसमस की शुभकामनाएं द ...और पढ़ें



पीएम मोदी ने दिल्ली के चर्च में क्रिसमस सर्विस में हिस्सा लिया। (फोटो- एक्स)


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को क्रिसमस के मौके पर दिल्ली और उत्तर भारत के बड़ी संख्या में ईसाई लोगों के साथ दिल्ली के द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में क्रिसमस की सुबह की प्रार्थना में हिस्सा लिया।


दरअसल, इस प्रार्थना सभा में प्रार्थनाएं, कैरोल, भजन और दिल्ली के बिशप राइट रेवरेंड पॉल स्वरूप द्वारा प्रधान मंत्री के लिए एक विशेष प्रार्थना शामिल थी।
पीएम मोदी ने दी जानकारी

प्रधानमंत्री मोदी ने इस संबंध में एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी दी। पीएम मोदी ने लिखा कि दिल्ली में द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में क्रिसमस की सुबह की प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। इस प्रार्थना सभा में प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलका। क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और सद्भावना को प्रेरित करे।


इससे पहले पीएम मोदी ने नागरिकों को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने लिखा कि सभी को शांति, करुणा और आशा से भरे क्रिसमस की शुभकामनाएं। यीशु मसीह की शिक्षाएं हमारे समाज में सद्भाव को मजबूत करें।