नई दिल्ली। साइंटिस्टों के अनुसार पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकली ऐक्टिव न होने की वजह से प्योर प्लास्टिक बेहद कम जहरीला होता है। लेकिन जब इसमें दूसरी तरह के प्लास्टिक और कलर आदि मिला दिए जाते हैं तो यह नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। ये केमिकल खिलौने या दूसरे प्रॉड्क्ट्स में से गर्मी के कारण पिघलकर बाहर आ सकते हैं।
इस खतरे को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने बच्चों के खिलौनों और चाइल्ड केयर प्रोडक्ट्स में इस तरह की प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित कर दिया है। यूरोप ने साल 2005 में ही इस पर बैन लगा दिया था तो जापान समेत 9 दूसरे देशों ने भी बाद में इस पर पाबंदी लगा दी। अब एनजीटी ने दिल्ली में 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक के यूज पर बैन लगा दिया है।
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस बात को माना है कि सभी तरह की प्लास्टिक एक समय के बाद केमिकल छोड़ने लगती हैं, खासकर जिन्हें गर्म किया जाता है। मैक्स डे-केयर लाजपत नगर के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर पीके जुल्का ने कहा कि बार-बार गर्म करने से इन कंटेनर्स के प्लास्टिक के केमिकल्स टूटने शुरू हो जाते हैं और फिर ये खाने-पीने की चीजों में मिक्स हो जाते हैं।
डॉक्टर जुल्का का कहना है कि जब कम माइक्रोन के प्लास्टिक को गर्म किया जाता है या फिर जब उसमें गर्म खाने की चीज ढोने के लिए यूज किया जाता है तो प्लास्टिक से पॉलीसाइकलिक हाइड्रोकार्बन निकलता है, यह एक प्रकार का केमिकल है जिससे कैंसर होता है। जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
Friday, August 11, 2017
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Author: Sadbhavna News verified_user
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