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जबलपुर। लगातार ट्रांसफर से परेशान होकर एक न्यायाधीश ने हाईकोर्ट के गेट नंबर तीन के सामने धरना दे दिया। उनका प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। दरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ऐसा बार हुआ है। जबलपुर में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास ने ने चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया और चीफ जस्टिस आॅफ मध्यप्रदेश तथा रजिस्ट्रार जनरल से गुहार लगाई है। हाईकोर्ट के गेट नंबर तीन के सामने धरना देने बैठे न्यायाधीश का कहना है कि 18 साल की नौकरी में अब तक उनका 12 बार ट्रांसफर किया जा चुका है। इसमें पिछले 15 माह में ही उनका 5 बार ट्रांसफर हुआ है। 15 महीने पहले वे धार में पदस्थ थे जहां से शहडोल वहां से सिहोरा फिर जबलपुर और अब नीमच ट्रांसफर किया गया है।
पहले दे दी सूचना फिर किया अनशन
मजिस्ट्रेट श्रीवास ने यह आरोप भी लगाया है कि मांगे जाने पर भी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी एसीआर की कॉपी नहीं दी जा रही है। जबकि सुप्रीम कोर्ट अपने एक निर्णय में यह अधिकार कर्मचारियोंं और अधिकारियों को प्रदान कर चुका है। ऐेसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सिस्टम में प्रमोशन-डिमोशन और ट्रांसफर का खेल चल रहा है। न्यायाधीश श्रीवास ने कहा वे अचानक धरने पर नहीं बैठे हैं बल्कि उच्चाधिकारियों को सूचना देकर उन्होंने धरना शुरु किया है।
इधर...डबरा जज से पुलिस ने बदसूलकी, शिकायत
ग्वालियर के डबरा में पुलिस वालों को जज से बदसलूकी करना भारी पड़ गया। दरअसल, गाड़ी हटाने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद जेएमएफसी पुलिस स्टाफ पर कार्रवाई के लिए सोमवार को दोपहर बाद डीजे से मुलाकात कर शिकायत की। डबरा थाना इलाके में पुल के पास पुलिस का रास्ते में कार से साइड मांगने को लेकर जेएमएफसी मनोज कुमार गोयल से विवाद हो गया था। मामले में गोयल ने प्राथमिक उपचार के बाद थाना प्रभारी समेत अन्य पुलिस कर्मियों पर एफआईआर के लिए आवेदन भी दिया। इस दौरान पुलिस की गाड़ी का गेट खुलने के दौरान जेएमएफसी मनोज कुमार गोयल के मुंह में चोट आई थी। विवाद के बाद एएसपी राजेश त्रिपाठी ने एक एएसआई व दो हवलदार को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया।
Tuesday, August 1, 2017
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Author: Sadbhavna News verified_user
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