रात के अंधेरे में पेरिस में फिल्माया गया था Shammi Kapoor का ये गाना, संगीतकार के साथ हुई थी अनहोनी
Shammi Kapoor और शर्मिला टैगोर की जोड़ी सिनेमा जगत में सबसे परफेक्ट मानी जाती थी। दोनों ने साथ मिलकर में एक से बढ़कर एक मूवीज के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। आज हम आपको इन दोनों पर फिल्माए गए उस गीत के बारे में बताने जा रहे हैं जो पेरिस में शूट हुआ था।
शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर का गाना (फोटो क्रेडिट- यूट्यूब)सिनेमा जगत की फिल्मों के साथ-साथ कई गीत ऐसे रहे हैं, जो कल्ट माने जाते हैं। इसी आधार पर आज हम आपके लिए शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) और शर्मिला टैगोर (Sharmila Tagore) को उस गाने की अहम जानकारी लेकर आए हैं, जिससे हिंदी सिनेमा में दो दिग्गजों की जोड़ी का आगाज हुआ।
इस गीत को पेरिस में फिल्माया गया था। लेकिन इसकी रिलीज से पहले ही संगीतकार के साथ बड़ी अनहोनी हो गई थी। लेकिन फिर भी उन्होंने इस गीत पर काम करना बंद नहीं किया। आइए जानते हैं कि यहां किस फिल्म के कौन से गाने का जिक्र हो रहा है।
पेरिस में शूट हुआ था ये गीत
शर्मिला टैगौर और शम्मी कपूर की जोड़ी हिट फिल्मों की गारंटी मानी जाती थी। दोनों साथ में मिलकर एक से बढ़िया एक मूवीज के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उनमें से एक फिल्म एन इवनिंग इन पेरिस रही, जिसे 1967 में निर्देशक शक्ति सामंत के निर्देशन में रिलीज किया गया था। इस मूवी से ही शक्ति सामंत और संगीतकार शंकर-जय किशन की आइकॉनिक जोड़ी की शुरुआत हुई।
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फोटो क्रेडिट- यूट्यूब
बतौर संगीतकार शंकर-जय किशन ने एन एवनिंग इन पेरिस में अपने हुनर का नमूना पेश किया। जिसका अंदाजा आप फिल्म के गाने रात के हमसफर... से लगा सकते हैं। लेखक यतींद्र मिश्रा ने इस गीत को लेकर अपने फेसबुक वीडियो बड़ा ही सुंदर अवलोकन किया है। उन्होंने बताया कि एन इवनिंग इन पेरिस का ये गाना पेरिस और बाद में नटराज स्टूडियो में शूट हुआ था।
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सुरों की कोकिला लता मंगेशकर और मधुर आवाज के धनी मोहम्मद रफी साहब से फिल्म के गाने को गाया था। आज भी इस गीत को फैंस सुनना पसंद करते हैं। एक रोमांटिक गीत के तौर पर रात के हमसफर आज भी बॉलीवुड का क्लट सॉन्ग माना जाता है।
संगीतकार के साथ हुई अनहोनी
शक्ति सामंता और जय शंकर किशन की जोड़ी फिल्म सिंगापुर में काम कर चुकी थी। लेकिन अधिक लोकप्रियता एन इवनिंग इन पेरिस से मिला। रात के हमसफर से जुड़ा दुखद पहलू ये था कि गाने की रिकॉर्डिंग से पहले शंकर की मां का निधन हो गया था। इसके बाद भी उन्होंने इस गीत की धुन को तैयार किया और अपने काम से अपनी मां को श्रद्धांजलि दी। जय किशन ने इसे गाने के लिए मना कर दिया था, लेकिन शंकर के आगे वह झुक गए।
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