प्रदेश के 100 आदर्श गांवों को भी डीएमएफ से 110 करोड़ रूपए मंजूर
रायपुर, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर छत्तीसगढ़ के खनिज धारक जिलों में गठित जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि से अब तक 30 हजार से ज्यादा कार्यों के लिए तीन हजार 600 करोड़ रूपए से ज्यादा राशि मंजूर की जा चुकी है। इनमें से दो हजार करोड़ से ज्यादा राशि का उपयोग किया जा चुका है। शासी परिषदों की अनुमोदित कार्य योजना के आधार पर ये कार्य मंजूर किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की 36वीं कड़ी में श्रोताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने रेडियो श्रोताओं को बताया-डीएमएफ के मद से राज्य के 14 जिलों के 100 आदर्श गांवों में 110 करोड़ रूपए से ज्यादा के कार्य मंजूर किए गए हैं। अगले दो-तीन साल में इनमें से प्रत्येक आदर्श गांव में पांच करोड़ रूपए खर्च करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा-डीएमएफ की 60 प्रतिशत राशि का उपयोग खनन संक्रियाओं से प्रभावित इलाकों में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, खेती-किसानी, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार, स्वच्छता और वृद्ध एवं निःशक्तजन कल्याण के कार्यों में किया जा रहा है। भौतिक अधोसंरचनाओं के साथ सिंचाई और बिजली आदि को भी अन्य प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा-नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ में डीएमएफ के क्रियान्वयन की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों को भी इसका अनुकरण करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा-छत्तीसगढ़ की गिनती देश के प्रमुख खनिज धारक राज्य के रूप में होती है। यहां उपलब्ध खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा उत्साहवर्धक है। आजादी के साढ़े छह दशक बाद जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार की बागडोर संभाली, तो उन्होंने पहली बार खनन संक्रियाओं से प्रभावित क्षेत्रों और वहां की जनता के हितों की चिंता की। श्री मोदी की पहल पर खनिज कानून में ऐसे क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) के गठन का प्रावधान किया गया। इसके अंतर्गत शासी परिषदों द्वारा अनुमोदित कार्य योजना के आधार पर छत्तीसगढ़ में 30 हजार से ज्यादा कार्यों के लिए 3600 करोड़ रूपए से ज्यादा राशि की स्वीकृति जारी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन और उससे संबंधित संक्रियाओं का प्रभाव केवल गांव अथवा जिले की सीमा तक नहीं होता, बल्कि जिले की सीमा से बाहर के क्षेत्र भी प्रभावित होते हैं, इसलिए अंशदान की राशि का उपयोग ऐसे क्षेत्रों में भी करने के प्रावधान किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को बेहतर सुविधाएं देने और व्यवहारिक लाभ देने के लिए जरूरी बड़े कार्य जिला मुख्यालय के स्तर पर ही किए जा रहे हैं। डीएमएफ की योजना में जन भागीदारी और पारदर्शिता के लिए जिला न्यास की शासी परिषद में खनन प्रभावित इलाकों की दो ग्राम पंचायतों के सरपंचों और तीन जनप्रतिनिधियों सहित खनिज पट्टेधारकों के तीन प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। किए जा रहे कार्यो का सामाजिक ऑडिट ग्राम सभाओं में करने का प्रावधान भी किया गया है। सांसदों की अध्यक्षता वाली दिशा समिति द्वारा भी डीएमएफ के कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखाकार से मान्यता प्राप्त चार्टर्ड एकांउटेंट द्वारा हर साल न्यास निधि की ऑडिट की जा रही है और उसकी रिपोर्ट वेबसाइट में डाली जा रही है।

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